RAMAKRISHNA PARAMHANS (PB)


Price: ₹150.00
(as of Jan 17,2022 00:24:46 UTC – Details)

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From the Publisher

Ramakrishna Paramhans by Pradeep Pandit

Ramakrishna Paramhans by Pradeep PanditRamakrishna Paramhans by Pradeep Pandit

भक्‍त‌ि एक भाव है, स्थिति है, इसलिए उसमें गणित नहीं होता। होता है तो सिर्फ भरोसा और विश्‍वास।

गंगा के किनारे बसा बेलूर मठ अब भी अपने परमहंसी स्वरूप में है। रामकृष्ण का कमरा, उनकी चारपाई सबकुछ वैसा ही है जैसा कभी था। नहीं है तो रामकृष्ण की वह देह, जिसके जरिए उन्होंने अध्यात्म के अनेक अभ्यास किए और संसार को प्रायोगिक भक्‍त‌ि की प्रामाणिकता से अवगत कराया।
परमहंस के पहले और बाद में भक्‍त‌ि सिर्फ याचक की याचना से ज्यादा नहीं रही; लेकिन रामकृष्ण ने भक्‍त‌ि के शाब्दिक कायांतरण के प्रमाण उजागर किए। भक्‍त‌ि के उनके प्रयोगों की दुनिया शब्द, अर्थ, ध्वनि के आकाशों से घिरी हुई दुनिया है, जिसकी शुरुआत रामकृष्ण स्कूली जीवन में ही कर चुके थे।
भक्‍त‌ि एक भाव है, स्थिति है, इसलिए उसमें गणित नहीं होता। होता है तो सिर्फ भरोसा और विश्‍वास। रामकृष्ण अपने स्कूली जीवन में गणित में कमजोर थे, पर उस समय भी वे धार्मिक या धर्म पर बोलनेवाले संतों, महात्माओं को सुनते और अपने दोस्तों को ठीक वैसा ही सुनाकर चकित कर देते। उन्हें रास आता था सिर्फ अध्यात्म का रास्ता।
भारत के आध्यात्मिक महापुरुषों में अग्रणी रामकृष्ण परमहंस की पूरी जीवन-यात्रा इस लौकिक जगत् को अतार्किक और अबूझ जगत् से नि:शब्द जोड़ने की यात्रा है। रामकृष्ण परमहंस के जीवन को जानने-समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।

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प्रदीप पंडित विगत तीस वर्षों से पत्रकारिता में। जनसत्ता, संडे मेल, दैनिक भास्कर से होते हुए अनेक समाचार-पत्रों का संपादन। दर्जनों अनुवाद। स्टीफन स्पेंडर और रवींद्र नाथ टैगोर की कृतियाँ, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए काम। ‘छत’ टेलीफिल्म और ‘तिराहा’ रेडियो-नाटक पुरस्कृत। उपन्यास ‘प्रति प्रश्‍न’ हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा ‘साहित्यिक कृति पुरस्कार’ से पुरस्कृत।.

Swami Dayanand Saraswati by Madhur Athaiya

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Shri Guru Nanak Devji by Dr. Kuldeep Chand Agnihotri

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Jagadguru Adya Shankaracharya by Shivdas Pandey

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PARAMHANS YOGANAND : EK JEEVANI by Rachna Bhola 'Yamini'

PARAMHANS YOGANAND : EK JEEVANI by Rachna Bhola 'Yamini'

Swami Dayanand Saraswati by Madhur Athaiya

आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती भारत के प्रख्यात समाज सुधारक; चिंतक और देशभक्त थे। वे बचपन में ‘मूलशंकर’ नाम से जाने जाते थे। महर्षि ने सभी धर्मों में व्याप्त बुराइयों का कड़े शब्दों में खंडन किया और अपने महान् ग्रंथ ‘सत्यार्थप्रकाश’ में उनका विश्लेषण किया। बचपन की एक घटना ने उन्हें उद्वेलित कर दिया और ईश-भक्ति से उनका मोह भंग हो गया; जब उन्होंने देखा कि भगवान् पर चढ़ा भोग चूहे खा रहे हैं; पर भगवान् उन्हें भगाने में अक्षम हैं। जीवन-मृत्यु के प्रश्न उन्हें बचपन से ही मथने लगे थे। माता-पिता उनके विवाह की जुगत लगाने लगे तो सन् 1846 में उन्होंने गृह-त्याग किया और स्वामी विरजानंद को अपना गुरु बनाकर वैदिक साहित्य का अध्ययन किया। शिक्षा व सत्यार्थ पाकर उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की और धर्म में व्याप्त बुराइयों का तार्किक खंडन किया। कहते हैं कि एक रहस्यमय घटनाक्रम में इन महान् समाज-सेवी; दार्शनिक और प्रखर वक्ता को पिसा काँच और विष देकर मार दिया गया। समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से पठनीय धर्मध्जवाहक स्वामी दयानंद सरस्वती की प्रेरणाप्रद जीवनी।

Shri Guru Nanak Devji by Dr. Kuldeep Chand Agnihotri

नानक को जानने के लिए; नानक को अपने भीतर अनुभव करना होगा। उन वीरान बियावानों की मानसिक यात्रा करनी होगी जिनकी नानक देवजी ने यथार्थ में यात्रा की थी। सुदूर दक्षिण में धनुषकोटि के किनारे विशाल सागर की उत्ताल लहरों को देखते हुए; उनमें श्रीलंका को जा रहे नानक देव की छवि को अपने मुँदे नेत्रों से देखना होगा। नानक को जानने का यही अमर नानक-मार्ग है। इस पुस्तक में लेखक ने यही करने का प्रयास किया है। नानक देवजी को समझने-बूझने के लिए; उस कालखंड की सभी परतों को उन्होंने एक-एक कर अनावृत्त किया है। यह पुस्तक किसी एक ढर्रे से बँधी हुई नहीं है; बल्कि नानक देवजी के विविधपक्षीय जीवन के ताजा स्नैप्स हैं। इसलिए इस अध्ययन में एक ताजगी है; ताजा हवा के एक झोंके का अहसास। गुरु नानक देवजी से शुरू हुई इस यात्रा के अंतिम अध्याय तक पहुँचते-पहुँचते; रास्ते के सभी पड़ावों की अविछिन्नता एवं वैचारिक निरंतरता को पुस्तक के अंतिम अध्याय में इंगित किया गया है। पुस्तक की उपादेयता विविध प्रसंगों की नवीन युगानुकूल व्याख्या में है।

Jagadguru Adya Shankaracharya by Shivdas Pandey

शंकराचार्य एक ऐसे शास्त्राचार्य का नाम है; जो संस्कृति-रक्षा को युद्ध मानकर शास्त्रार्थ करता है और जिसका अस्त्र-शस्त्र सबकुछ शास्त्र तथा जिसका युद्ध मात्र शास्त्रार्थ है एवं जिसकी शति हजारो-हजार वर्षों की ऋषि-प्रति-ऋषि एवं तपस्या-प्रति-तपस्या सिद्ध ज्ञान-संपदा है। वह न तो खलीफाओं की तरह युद्ध करता है और न नियोजित बोधिसवों की तरह; न ही जैसा देश; वैसा वेश; वैसा धर्म का सिका चलानेवाले ईसाई पादरियों की तरह। वह शास्त्र के शस्त्र से शास्त्रार्थ का युद्ध लड़ना जानता है—धर्म के क्षेत्र में ज्ञान तथा न्याय के निर्धारित विधानों के सर्वथा अनुरूप। यह युद्ध षड्दर्शनों तथा षड्चक्रों के साधकों के साथ-साथ इन ब्रह्मवादी शैव-दर्शन के तंत्रोन्मुख कश्मीरी शैवों से भी होता है और वह सोलह वर्षों में सभी विवादों का समाधान ढूँढ़कर वैदिक संस्कृति को पुन: स्थापित करता है। शंकराचार्य जैसा आचार्य होना; एक योगसिद्ध-ज्ञानसिद्ध तथा ध्यानसिद्ध आचार्य होना और ऐसे आचार्य का एक सिद्ध जगद्गुरु हो जाने का भी कोई विशेष अर्थ होता है।

PARAMHANS YOGANAND : EK JEEVANI by Rachna Bhola ‘Yamini’

परम विशिष्ट आध्यात्मिक विभूतियों में से एक श्री श्री परमहंस योगानंदजी द्वारा दी गई शिक्षाएँ तथा कालजयी विचार धर्म; दर्शन; विज्ञान; मनोविज्ञान; शिक्षा आदि क्षेत्रों के लिए समान रूप से सार्थक और स्तुत्य हैं। उन्होंने विदेशों में क्रिया; योग; विज्ञान तथा अध्यात्म के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय योगदान दिया; उसे भुलाया नहीं जा सकता। पूज्य परमहंस योगानंद ने ‘योगदा सत्संग सोसाइटी’ तथा ‘सेल्फ रियलाइजेशन फैलोशिप’ नामक संस्थाओं की स्थापना की। ये संस्थाएँ अपने जगद्गुरु के संदेशों तथा विचारों को मौलिक व प्रामाणिक रूप में पूरे विश्व में प्रचारित करने के लिए कटिबद्ध हैं। इस पुस्तक को तैयार करने में स्वामीजी की इन्हीं संस्थाओं से प्रकाशित पुस्तकों से मदद ली गई है—विशेष रूप से पूज्य स्वामीजी द्वारा लिखित ‘योगी कथामृत’ से। इस पुस्तक में स्वामी योगानंदजी के विचारों को ही मूर्त रूप प्रदान किया गया है। त्याग; तपस्या; संयम; योग; अध्यात्म से अनुप्राणित पूज्य स्वामी परमहंस योगानंद का अद्भुत चरित्र-चित्रण; जो सामान्य जन को प्रेरित करेगा और एक आदर्श मानव बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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Publisher ‏ : ‎ Prabhat Prakashan; 1st edition (1 January 2019); Prabhat Prakashan – Delhi
Language ‏ : ‎ Hindi
Paperback ‏ : ‎ 136 pages
ISBN-10 ‏ : ‎ 9350483432
ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9350483435
Reading age ‏ : ‎ 18 years and up
Item Weight ‏ : ‎ 151 g
Dimensions ‏ : ‎ 20 x 14 x 4 cm
Country of Origin ‏ : ‎ India
Importer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan – Delhi
Packer ‏ : ‎ Prabhat Prakashan – Delhi
Generic Name ‏ : ‎ Books

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